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सेक्टर-51 से 52 मेट्रो स्टेशन पहुंचिए बस 5 मिनट में, दिल्ली-NCR का पहला AC स्काईवॉक हुआ शुरू

 Written By: Kajal Kumari
 Published : Aug 29, 2026 09:36 am IST,  Updated : Aug 29, 2026 09:36 am IST

दिल्ली-एनसीआर का पहला एसी स्काईवॉक शुरू हो गया है, अब आपको सेक्टर 52 से सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशन पहुंचने में मात्र पांच मिनट का वक्त लगेगा। इसके शुरू होने से एक्वा लाइन और ब्लू लाइन के यात्रियों को सुविधा होगी।

दिल्ली एनसीआर में एसी स्काईवॉक शुरू- India TV Hindi
दिल्ली एनसीआर में एसी स्काईवॉक शुरू

दिल्ली-एनसीआर का पहला एसी स्काईवॉक शुरू हो गया है। नोएडा अथॉरिटी ने रक्षाबंधन पर शुक्रवार को बिना किसी औपचारिक उद्घाटन के स्काईवॉक को जनता के लिए खोल दिया है। एक के बाद एक दस डेडलाइन खत्म होने के बाद यह पहला एसी स्काईवॉक शुरू हुआ है। ये स्काईवॉक सेक्टर-51 (एक्वा लाइन) और सेक्टर-52 (ब्लू लाइन) मेट्रो स्टेशनों को जोड़ता है और इसके शुरू होने के बाद मेट्रो से सफर करने वाले लोगों को राहत मिलेगी। रक्षाबंधन को शुरू किए गए पहले दिन मेट्रो के सेक्टर-52 ब्लू लाइन से सेक्टर-51 एक्वा लाइन को जोड़ने के लिए बने इस स्काईवाक का 45 हजार से अधिक यात्रियों ने उपयोग किया।

एसीईओ ने क्या बताया?

नोएडा अथॉरिटी की एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने बताया कि स्काईवॉक के जरूरी काम पूरे होने के बाद इसे ट्रायल बेस पर खोलने के आदेश दिए गए हैं। अभी इसे बिना औपचारिक उद्घाटन के शुरू किया गया है, ताकि यात्रियों को इसकी सुविधा मिल सके। इससे बरसात के दौरान मेट्रो से यात्रा करने वालों को काफी मदद मिलेगी क्योंकि स्काईवॉक शुरू होने से सेक्टर-51 (एक्वा लाइन) और सेक्टर-52 (ब्लू लाइन) का रास्ता करीब पांच मिनट में पूरा हो जाएगा। 

कैसा है ये एसी स्काईवॉक?
इसके निर्माण पर करीब 33 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसकी लंबाई लगभग 460 मीटर और चौड़ाई करीब छह मीटर है। इसमें हर 50 मीटर पर कुल 10 ट्रैवलेटर (स्वचालित सीढ़ियां /रैंप) लगाए गए हैं। इसके चालू होने से पहले मेट्रो के यात्रियों को दोनों स्टेशनों के बीच संकरे, भीड़भाड़ वाले पैदल मार्ग, ऑटो-ई-रिक्शा और विक्रेताओं से भरे रास्ते से गुजरना पड़ता था। इस स्काईवॉक का निर्माण मार्च 2023 में शुरू हुआ था।

कितनी है स्काईवॉक की लागत?
अथॉरिटी की एसीईओ ने बताया कि ट्रायल के दौरान मुसाफिरों के साथ तकनीकी टीम के फीडबैक के आधार पर सुधार करके इसका अधिकारिक उद्घाटन भी हो सकता है। इसे छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य था। इसके डिजाइन में बदलाव, मेट्रो केबल, बीम की समस्या, एनजीटी प्रतिबंध और अन्य तकनीकी कारणों से इस प्रॉजेक्ट की दस डेडलाइन निकल चुकी थी। तीन साल पहले इसकी लागत 25 करोड़ थी, जो बाद में 33 करोड़ रुपये हो गई।

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